आत्मस्वरूप विषयक प्रश्न

0 टिप्पणीहरू 578 आगन्तुकहरू

(गुरुका उत्तरहरू माथि शिष्यका जिज्ञाशाहरू उठिरहेका छन् ।)

मिथ्यात्वेन निषिद्धेषु कोशेष्वेतेषु पञ्चसु ।
सर्वाभावं विना किञ्चिन्न पश्याम्यत्र हे गुरो ।
विज्ञेयं किमु वस्त्वस्ति स्वात्मनात्र विपश्चिता ।।२१४।।

हे गुरु ! मिथ्यारूप यी पाँचकोशलाई निराकरण गरेपछि शून्यता अतीरिक्त म यहाँ केही देख्दिन । (यस्तो अवस्थामा) विचार कुशल पुरुषले कुन वस्तुलाई आफ्नो आत्माको रूपमा जान्नु पर्दछ ? ।।२१४।।

पाँच कोशहरूमध्ये चारकोश (अन्नमय, प्राणमय, मनोमय, बुद्धिमय) लाई आत्मा होइन, भनेर निषेध गरिसकेपछि अन्तिममा जब गुरु शेष रहेको “आनन्दमय कोश” लाई त्यो पनि आत्मा होइन भनेर निषेध गर्नुभयो । आत्माको स्वरूप आनन्द हो भनेर बुझिरहेको अवस्थामा गुरुको यो वाक्यले शिष्यमा नयाँ जिज्ञासाको सिर्जना गर्दछ । स्वभावतः अब कुनै वस्तु केही शेष रहेको नदेखिएकोले शिष्यको मनमा माथिको प्रश्न उठेको छ ।

आत्मा भन्ने तङ्खव सुन्दा सहज झैं सुनिए पनि, बुझिए पनि यथार्थ रूपमा यसको ज्ञान प्राप्त गर्न,बुझ्न कठिन भएकोले विविध जिज्ञासाहरू, प्रश्नहरू अत्यन्त स्वाभाविक छन् । आत्मा साक्षात्कार नभएसम्म साधकमा आत्मा सम्बन्धी विविध प्रश्नहरू उठी रहन्छन् ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *


CAPTCHA Image
Reload Image

पुराना लेखहरु

लेखहरु प्रकाशित मिति आगन्तुकहरू टिप्पणीहरू
किन महासतिपवान मात्र सत्यमोक्ष साधना हो ? 08 poush 2079 744 0
मंगलाचरण 1/15/2023 721 0
मुक्तिको दुर्लभता 1/15/2023 618 0
मनुष्य जन्मको दुर्लभता 1/15/2023 878 0
विचारको महङ्खव 1/15/2023 593 0
शिष्य लक्षण 1/15/2023 714 0
साधन–चतुष्टय 1/15/2023 1743 0
वैराग्य र मुमुक्षताको महङ्खव 1/15/2023 704 0
सद्गुरु लक्षण 739 0
शिष्य प्रार्थना 1/15/2023 795 0
गुरु कर्तव्य 1/15/2023 819 0
1/15/2023 587 0
शिष्य प्रशंसा 1/15/2023 640 0
मोक्षमा स्वप्रयत्नको प्रधानता 1/15/2023 658 0
शास्त्र अध्ययनको मिथ्यात्व 1'/15/2023 718 0
अपरोक्षानुभवको आवश्यकता 636 0
स्थूल शरीरको व्याख्या 1/15/2023 1047 0
विषयविन्दा 1/15/2023 706 0
देहाशक्तिको निन्दा 1/15/2023 645 0
स्थूल शरीर निन्दा 1/15/2023 828 0
दश इन्द्रियहरू 1/15/2023 1080 0
अन्तःकरण चतुष्ट्य 1/15/2023 913 0
पञ्चप्राण 1/15/2023 852 0
सूक्ष्म शरीर वर्णन 1/15/2023 893 0
प्राणको धर्म 1/15/2023 556 0
अहंकार 1/15/2023 653 0
आत्माको परम प्रेमास्पदता 1/15/2023 540 0
माया वर्णन 1/15/2023 1330 0
रजोगुण 1/15/2023 688 0
तमोगुण 1/15/2023 584 0
सङ्खवगुण 1/15/2023 627 0
कारण शरीर 1/15/2023 820 0
आत्मा–निरूपण 1/15/2023 636 0
अध्यास 1/15/2023 792 0
आवरण र विक्षेपशक्ति 1/15/2023 806 0
बन्ध निरूपण 1/15/2023 604 0
अन्नमय कोश 1/15/2023 636 0
प्राणमय कोश 1/15/2023 682 0
मनोमय कोश 1/15/2023 619 0
विज्ञानमय कोश 1/15/2023 680 0
मुक्ति कसरी प्राप्त हुन्छ ? 1/15/2023 773 0
आनन्दमय कोश 1/15/2023 542 0
आत्मस्वरूप निरूपण 1/15/2023 643 0
ब्रह्मा र जगत्को एकता 1/15/2023 539 0
जगत्को मिथ्यात्व 1/15/2023 659 0
ब्रह्म निरूपण 1/15/2023 875 0
महावाक्य – विचार 1/15/2023 764 0
ब्रह्मा–भावना 1/15/2023 720 0
वासना त्याग 1/15/2023 745 0
अध्यास निराकरण 1/15/2023 736 0
अहंपदार्थ निरूपण 1/15/2023 630 0
अहंकार – मुख्यवाधा 1/15/2023 550 0
क्रिया, चिन्ता, र वासना त्याग 1/15/2023 565 0
प्रमाद – निन्दा 1/15/2023 681 0
अविद्याको स्थिति 1/15/2023 660 0
आत्म निष्ठाबाट सर्वात्मभाव 1/15/2023 637 0
समाधिद्वारा विकल्पको नाश 1/15/2023 689 0
ध्यानद्वारा परमात्मभावको प्राप्ती 1/15/2023 752 0
निर्विकल्प समाधिको महङ्खव 1/15/2023 622 0
समाधि – प्राप्तिको उपाय 1/15/2023 662 0
वैराग्य र मुमुक्षुताको आवश्यकता 1/15/2023 629 0
ध्यान विधि 1/15/2023 624 0
आत्म दृष्टि 1/15/2023 677 0
ब्रह्ममा भेदको अभाव 1/15/2023 676 0
आत्म चिन्तनको उपदेश 1/15/2023 586 0
शरीर उपेक्षा 1/15/2023 565 0
आत्मज्ञानको फल 1/15/2023 662 0
जीवनमुक्तको लक्षण 1/15/2023 681 0
प्रारब्ध कर्म विचार 708 0
प्रारब्ध निराकरण 1/15/2023 659 0
नानात्व – निषेध 1/15/2023 713 0
वेदान्त – सिद्धान्तको सार 1/15/2023 738 0
बोधोपलब्धी 1/15/2023 646 0
शिष्यको अनुभव 1/15/2023 699 0
सद्गुरूप्रति कृतज्ञता 1/15/2023 828 0
गुरुको अन्तिम उपदेश 1/15/2023 1037 0
आत्माको अविनाशिता 1/15/2023 1105 0
परमार्थता 1/15/2023 1596 0
शिष्य बिदाइ 1/15/2023 1338 0
अनुवन्ध – चतृष्टय 1/15/2023 35851 0