आत्मस्वरूप विषयक प्रश्न

0 टिप्पणीहरू 632 आगन्तुकहरू

(गुरुका उत्तरहरू माथि शिष्यका जिज्ञाशाहरू उठिरहेका छन् ।)

मिथ्यात्वेन निषिद्धेषु कोशेष्वेतेषु पञ्चसु ।
सर्वाभावं विना किञ्चिन्न पश्याम्यत्र हे गुरो ।
विज्ञेयं किमु वस्त्वस्ति स्वात्मनात्र विपश्चिता ।।२१४।।

हे गुरु ! मिथ्यारूप यी पाँचकोशलाई निराकरण गरेपछि शून्यता अतीरिक्त म यहाँ केही देख्दिन । (यस्तो अवस्थामा) विचार कुशल पुरुषले कुन वस्तुलाई आफ्नो आत्माको रूपमा जान्नु पर्दछ ? ।।२१४।।

पाँच कोशहरूमध्ये चारकोश (अन्नमय, प्राणमय, मनोमय, बुद्धिमय) लाई आत्मा होइन, भनेर निषेध गरिसकेपछि अन्तिममा जब गुरु शेष रहेको “आनन्दमय कोश” लाई त्यो पनि आत्मा होइन भनेर निषेध गर्नुभयो । आत्माको स्वरूप आनन्द हो भनेर बुझिरहेको अवस्थामा गुरुको यो वाक्यले शिष्यमा नयाँ जिज्ञासाको सिर्जना गर्दछ । स्वभावतः अब कुनै वस्तु केही शेष रहेको नदेखिएकोले शिष्यको मनमा माथिको प्रश्न उठेको छ ।

आत्मा भन्ने तङ्खव सुन्दा सहज झैं सुनिए पनि, बुझिए पनि यथार्थ रूपमा यसको ज्ञान प्राप्त गर्न,बुझ्न कठिन भएकोले विविध जिज्ञासाहरू, प्रश्नहरू अत्यन्त स्वाभाविक छन् । आत्मा साक्षात्कार नभएसम्म साधकमा आत्मा सम्बन्धी विविध प्रश्नहरू उठी रहन्छन् ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *


CAPTCHA Image
Reload Image

पुराना लेखहरु

लेखहरु प्रकाशित मिति आगन्तुकहरू टिप्पणीहरू
किन महासतिपवान मात्र सत्यमोक्ष साधना हो ? 08 poush 2079 792 0
मंगलाचरण 1/15/2023 767 0
मुक्तिको दुर्लभता 1/15/2023 664 0
मनुष्य जन्मको दुर्लभता 1/15/2023 910 0
विचारको महङ्खव 1/15/2023 635 0
शिष्य लक्षण 1/15/2023 792 0
साधन–चतुष्टय 1/15/2023 1779 0
वैराग्य र मुमुक्षताको महङ्खव 1/15/2023 752 0
सद्गुरु लक्षण 793 0
शिष्य प्रार्थना 1/15/2023 885 0
गुरु कर्तव्य 1/15/2023 875 0
1/15/2023 615 0
शिष्य प्रशंसा 1/15/2023 698 0
मोक्षमा स्वप्रयत्नको प्रधानता 1/15/2023 703 0
शास्त्र अध्ययनको मिथ्यात्व 1'/15/2023 772 0
अपरोक्षानुभवको आवश्यकता 727 0
स्थूल शरीरको व्याख्या 1/15/2023 1083 0
विषयविन्दा 1/15/2023 758 0
देहाशक्तिको निन्दा 1/15/2023 687 0
स्थूल शरीर निन्दा 1/15/2023 878 0
दश इन्द्रियहरू 1/15/2023 1122 0
अन्तःकरण चतुष्ट्य 1/15/2023 991 0
पञ्चप्राण 1/15/2023 900 0
सूक्ष्म शरीर वर्णन 1/15/2023 935 0
प्राणको धर्म 1/15/2023 592 0
अहंकार 1/15/2023 705 0
आत्माको परम प्रेमास्पदता 1/15/2023 588 0
माया वर्णन 1/15/2023 1380 0
रजोगुण 1/15/2023 720 0
तमोगुण 1/15/2023 626 0
सङ्खवगुण 1/15/2023 725 0
कारण शरीर 1/15/2023 868 0
आत्मा–निरूपण 1/15/2023 698 0
अध्यास 1/15/2023 892 0
आवरण र विक्षेपशक्ति 1/15/2023 848 0
बन्ध निरूपण 1/15/2023 642 0
अन्नमय कोश 1/15/2023 722 0
प्राणमय कोश 1/15/2023 724 0
मनोमय कोश 1/15/2023 661 0
विज्ञानमय कोश 1/15/2023 734 0
मुक्ति कसरी प्राप्त हुन्छ ? 1/15/2023 808 0
आनन्दमय कोश 1/15/2023 590 0
आत्मस्वरूप निरूपण 1/15/2023 693 0
ब्रह्मा र जगत्को एकता 1/15/2023 565 0
जगत्को मिथ्यात्व 1/15/2023 703 0
ब्रह्म निरूपण 1/15/2023 907 0
महावाक्य – विचार 1/15/2023 798 0
ब्रह्मा–भावना 1/15/2023 756 0
वासना त्याग 1/15/2023 793 0
अध्यास निराकरण 1/15/2023 844 0
अहंपदार्थ निरूपण 1/15/2023 682 0
अहंकार – मुख्यवाधा 1/15/2023 602 0
क्रिया, चिन्ता, र वासना त्याग 1/15/2023 618 0
प्रमाद – निन्दा 1/15/2023 726 0
अविद्याको स्थिति 1/15/2023 716 0
आत्म निष्ठाबाट सर्वात्मभाव 1/15/2023 679 0
समाधिद्वारा विकल्पको नाश 1/15/2023 767 0
ध्यानद्वारा परमात्मभावको प्राप्ती 1/15/2023 792 0
निर्विकल्प समाधिको महङ्खव 1/15/2023 654 0
समाधि – प्राप्तिको उपाय 1/15/2023 732 0
वैराग्य र मुमुक्षुताको आवश्यकता 1/15/2023 675 0
ध्यान विधि 1/15/2023 654 0
आत्म दृष्टि 1/15/2023 733 0
ब्रह्ममा भेदको अभाव 1/15/2023 704 0
आत्म चिन्तनको उपदेश 1/15/2023 642 0
शरीर उपेक्षा 1/15/2023 629 0
आत्मज्ञानको फल 1/15/2023 718 0
जीवनमुक्तको लक्षण 1/15/2023 717 0
प्रारब्ध कर्म विचार 740 0
प्रारब्ध निराकरण 1/15/2023 697 0
नानात्व – निषेध 1/15/2023 761 0
वेदान्त – सिद्धान्तको सार 1/15/2023 812 0
बोधोपलब्धी 1/15/2023 680 0
शिष्यको अनुभव 1/15/2023 775 0
सद्गुरूप्रति कृतज्ञता 1/15/2023 886 0
गुरुको अन्तिम उपदेश 1/15/2023 1095 0
आत्माको अविनाशिता 1/15/2023 1163 0
परमार्थता 1/15/2023 1700 0
शिष्य बिदाइ 1/15/2023 1420 0
अनुवन्ध – चतृष्टय 1/15/2023 36037 0