वेदान्त – सिद्धान्तको सार

0 टिप्पणीहरू 737 आगन्तुकहरू

यो श्लोकमा गुरु सम्पूर्ण वेदान्तको निर्णयात्मक उपदेश दिनुहुन्छ ।

वेदान्तसिद्धान्तनिरुक्तिरेषा ब्रह्मैव जीवः सकलं जगच्च ।
अखण्डरूपस्थितिरेव मोक्षो ब्रह्माद्वितीयेश्रुतयः प्रमाणम् ।।४७९।।

वेदान्तको निर्णय अनुसार जीव जगत् ब्रह्म हो । त्यो ब्रह्ममस्थीत
रहनु मोक्ष हो । ब्रह्म अद्वितीय छ । यस विषयमा श्रुति प्रमाण छ । ।।४७९।।

वेदान्त दर्शनले द्वैत सत्तालाई स्वीकार गर्दैन । यसले अधिष्ठानको अस्तिङ्खवलाई स्विकार गर्दछ । आरोपित वस्तुको सत्तालाई स्विकार गर्दैन । वेदान्तको निर्णय यो छ की यो सम्पूर्ण जीव, जगत्, ब्रह्मााण्ड ब्रह्म हो । यहाँ ब्रह्मा बाहेक केही छैन । मनुष्य ब्रह्म हो । अज्ञानको कारणले उसले आफूलाई पृथक् मानिरहेको हो । जब ज्ञान प्राप्तगरि मनुष्यले स्वयंलाई ‘म ब्रह्म हुँ’ भन्ने अनुभूति प्राप्त गर्दछ । ‘म ब्रह्म हुँ’को त्यही अनुभूतिमा नित्य स्थीत रहनु मोक्ष हो । ब्रह्म अद्वितीय छ । यसलाई श्रुतिले प्रमाणित गरेको छ ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *


CAPTCHA Image
Reload Image

पुराना लेखहरु

लेखहरु प्रकाशित मिति आगन्तुकहरू टिप्पणीहरू
किन महासतिपवान मात्र सत्यमोक्ष साधना हो ? 08 poush 2079 744 0
मंगलाचरण 1/15/2023 721 0
मुक्तिको दुर्लभता 1/15/2023 618 0
मनुष्य जन्मको दुर्लभता 1/15/2023 878 0
विचारको महङ्खव 1/15/2023 593 0
शिष्य लक्षण 1/15/2023 714 0
साधन–चतुष्टय 1/15/2023 1743 0
वैराग्य र मुमुक्षताको महङ्खव 1/15/2023 704 0
सद्गुरु लक्षण 739 0
शिष्य प्रार्थना 1/15/2023 795 0
गुरु कर्तव्य 1/15/2023 819 0
1/15/2023 587 0
शिष्य प्रशंसा 1/15/2023 640 0
मोक्षमा स्वप्रयत्नको प्रधानता 1/15/2023 656 0
शास्त्र अध्ययनको मिथ्यात्व 1'/15/2023 718 0
अपरोक्षानुभवको आवश्यकता 636 0
स्थूल शरीरको व्याख्या 1/15/2023 1047 0
विषयविन्दा 1/15/2023 706 0
देहाशक्तिको निन्दा 1/15/2023 645 0
स्थूल शरीर निन्दा 1/15/2023 828 0
दश इन्द्रियहरू 1/15/2023 1080 0
अन्तःकरण चतुष्ट्य 1/15/2023 913 0
पञ्चप्राण 1/15/2023 852 0
सूक्ष्म शरीर वर्णन 1/15/2023 893 0
प्राणको धर्म 1/15/2023 556 0
अहंकार 1/15/2023 653 0
आत्माको परम प्रेमास्पदता 1/15/2023 540 0
माया वर्णन 1/15/2023 1330 0
रजोगुण 1/15/2023 688 0
तमोगुण 1/15/2023 584 0
सङ्खवगुण 1/15/2023 627 0
कारण शरीर 1/15/2023 820 0
आत्मा–निरूपण 1/15/2023 636 0
अध्यास 1/15/2023 792 0
आवरण र विक्षेपशक्ति 1/15/2023 806 0
बन्ध निरूपण 1/15/2023 604 0
अन्नमय कोश 1/15/2023 636 0
प्राणमय कोश 1/15/2023 682 0
मनोमय कोश 1/15/2023 619 0
विज्ञानमय कोश 1/15/2023 680 0
मुक्ति कसरी प्राप्त हुन्छ ? 1/15/2023 773 0
आनन्दमय कोश 1/15/2023 542 0
आत्मस्वरूप विषयक प्रश्न 1/15/2023 577 0
आत्मस्वरूप निरूपण 1/15/2023 643 0
ब्रह्मा र जगत्को एकता 1/15/2023 539 0
जगत्को मिथ्यात्व 1/15/2023 659 0
ब्रह्म निरूपण 1/15/2023 875 0
महावाक्य – विचार 1/15/2023 764 0
ब्रह्मा–भावना 1/15/2023 720 0
वासना त्याग 1/15/2023 745 0
अध्यास निराकरण 1/15/2023 736 0
अहंपदार्थ निरूपण 1/15/2023 630 0
अहंकार – मुख्यवाधा 1/15/2023 550 0
क्रिया, चिन्ता, र वासना त्याग 1/15/2023 564 0
प्रमाद – निन्दा 1/15/2023 681 0
अविद्याको स्थिति 1/15/2023 660 0
आत्म निष्ठाबाट सर्वात्मभाव 1/15/2023 637 0
समाधिद्वारा विकल्पको नाश 1/15/2023 689 0
ध्यानद्वारा परमात्मभावको प्राप्ती 1/15/2023 752 0
निर्विकल्प समाधिको महङ्खव 1/15/2023 622 0
समाधि – प्राप्तिको उपाय 1/15/2023 662 0
वैराग्य र मुमुक्षुताको आवश्यकता 1/15/2023 629 0
ध्यान विधि 1/15/2023 624 0
आत्म दृष्टि 1/15/2023 677 0
ब्रह्ममा भेदको अभाव 1/15/2023 676 0
आत्म चिन्तनको उपदेश 1/15/2023 586 0
शरीर उपेक्षा 1/15/2023 565 0
आत्मज्ञानको फल 1/15/2023 662 0
जीवनमुक्तको लक्षण 1/15/2023 681 0
प्रारब्ध कर्म विचार 708 0
प्रारब्ध निराकरण 1/15/2023 659 0
नानात्व – निषेध 1/15/2023 713 0
बोधोपलब्धी 1/15/2023 646 0
शिष्यको अनुभव 1/15/2023 699 0
सद्गुरूप्रति कृतज्ञता 1/15/2023 828 0
गुरुको अन्तिम उपदेश 1/15/2023 1037 0
आत्माको अविनाशिता 1/15/2023 1105 0
परमार्थता 1/15/2023 1596 0
शिष्य बिदाइ 1/15/2023 1336 0
अनुवन्ध – चतृष्टय 1/15/2023 35851 0