मंगलाचरण

0 टिप्पणीहरू 764 आगन्तुकहरू

सर्ववेदान्तसिद्धान्तगोचरं तमगोचरम् ।
गोविन्दं परमानन्दं सद्गुरुं प्रणतोऽस्म्यहम् ।। १ ।।

जो इन्द्रियहरूद्वारा अज्ञेय (अदृश्य) भए तापनि सर्ववेदान्तका सिद्धान्तहरूद्वारा ज्ञेय (जान्न, बुझ्न) सकिन्छ, त्यस्ता परमान्द स्वरूप सद्गुरु श्रीगोविन्दलाई नै प्रणाम गर्दछु । ।।१।।

यो ग्रन्थको प्रथम श्लोकमा आदि शंकराचार्य आफ्नो श्रद्वेय गुरु श्री गोविन्द पादलाई स्मरण गर्दै वन्दना गर्नुहुन्छ । यो प्राचीन गुरु–शिष्य परम्परामा गुरुप्रति दर्शाइने श्रद्धाको अनुपम उदाहरण हो ।

“गुरु श्रीगोविन्दपाद, जो स्वयं देहधारी पुरुष हुनुहुन्थ्यो, लाई परमात्मा स्वरूप अनि अज्ञेय (जान्न, बुझ्न नसकिने) भएर पनि वेदान्तका सिद्धान्तद्वारा ज्ञेय हुनुहुन्छ”, भनी सम्बोधन गरी वेदान्त दर्शनको मूलमर्मलाई प्रथम–श्लोकमा उद्वासित गर्नुभएको छ ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *


CAPTCHA Image
Reload Image

पुराना लेखहरु

लेखहरु प्रकाशित मिति आगन्तुकहरू टिप्पणीहरू
किन महासतिपवान मात्र सत्यमोक्ष साधना हो ? 08 poush 2079 790 0
मुक्तिको दुर्लभता 1/15/2023 660 0
मनुष्य जन्मको दुर्लभता 1/15/2023 906 0
विचारको महङ्खव 1/15/2023 631 0
शिष्य लक्षण 1/15/2023 788 0
साधन–चतुष्टय 1/15/2023 1773 0
वैराग्य र मुमुक्षताको महङ्खव 1/15/2023 750 0
सद्गुरु लक्षण 789 0
शिष्य प्रार्थना 1/15/2023 879 0
गुरु कर्तव्य 1/15/2023 871 0
1/15/2023 613 0
शिष्य प्रशंसा 1/15/2023 692 0
मोक्षमा स्वप्रयत्नको प्रधानता 1/15/2023 701 0
शास्त्र अध्ययनको मिथ्यात्व 1'/15/2023 770 0
अपरोक्षानुभवको आवश्यकता 725 0
स्थूल शरीरको व्याख्या 1/15/2023 1079 0
विषयविन्दा 1/15/2023 754 0
देहाशक्तिको निन्दा 1/15/2023 683 0
स्थूल शरीर निन्दा 1/15/2023 874 0
दश इन्द्रियहरू 1/15/2023 1116 0
अन्तःकरण चतुष्ट्य 1/15/2023 987 0
पञ्चप्राण 1/15/2023 896 0
सूक्ष्म शरीर वर्णन 1/15/2023 931 0
प्राणको धर्म 1/15/2023 588 0
अहंकार 1/15/2023 703 0
आत्माको परम प्रेमास्पदता 1/15/2023 586 0
माया वर्णन 1/15/2023 1376 0
रजोगुण 1/15/2023 718 0
तमोगुण 1/15/2023 624 0
सङ्खवगुण 1/15/2023 721 0
कारण शरीर 1/15/2023 866 0
आत्मा–निरूपण 1/15/2023 692 0
अध्यास 1/15/2023 890 0
आवरण र विक्षेपशक्ति 1/15/2023 844 0
बन्ध निरूपण 1/15/2023 638 0
अन्नमय कोश 1/15/2023 718 0
प्राणमय कोश 1/15/2023 722 0
मनोमय कोश 1/15/2023 659 0
विज्ञानमय कोश 1/15/2023 728 0
मुक्ति कसरी प्राप्त हुन्छ ? 1/15/2023 806 0
आनन्दमय कोश 1/15/2023 586 0
आत्मस्वरूप विषयक प्रश्न 1/15/2023 629 0
आत्मस्वरूप निरूपण 1/15/2023 689 0
ब्रह्मा र जगत्को एकता 1/15/2023 563 0
जगत्को मिथ्यात्व 1/15/2023 699 0
ब्रह्म निरूपण 1/15/2023 905 0
महावाक्य – विचार 1/15/2023 794 0
ब्रह्मा–भावना 1/15/2023 750 0
वासना त्याग 1/15/2023 789 0
अध्यास निराकरण 1/15/2023 838 0
अहंपदार्थ निरूपण 1/15/2023 678 0
अहंकार – मुख्यवाधा 1/15/2023 598 0
क्रिया, चिन्ता, र वासना त्याग 1/15/2023 614 0
प्रमाद – निन्दा 1/15/2023 722 0
अविद्याको स्थिति 1/15/2023 712 0
आत्म निष्ठाबाट सर्वात्मभाव 1/15/2023 675 0
समाधिद्वारा विकल्पको नाश 1/15/2023 763 0
ध्यानद्वारा परमात्मभावको प्राप्ती 1/15/2023 788 0
निर्विकल्प समाधिको महङ्खव 1/15/2023 650 0
समाधि – प्राप्तिको उपाय 1/15/2023 728 0
वैराग्य र मुमुक्षुताको आवश्यकता 1/15/2023 673 0
ध्यान विधि 1/15/2023 652 0
आत्म दृष्टि 1/15/2023 729 0
ब्रह्ममा भेदको अभाव 1/15/2023 700 0
आत्म चिन्तनको उपदेश 1/15/2023 640 0
शरीर उपेक्षा 1/15/2023 625 0
आत्मज्ञानको फल 1/15/2023 712 0
जीवनमुक्तको लक्षण 1/15/2023 713 0
प्रारब्ध कर्म विचार 736 0
प्रारब्ध निराकरण 1/15/2023 693 0
नानात्व – निषेध 1/15/2023 755 0
वेदान्त – सिद्धान्तको सार 1/15/2023 808 0
बोधोपलब्धी 1/15/2023 676 0
शिष्यको अनुभव 1/15/2023 771 0
सद्गुरूप्रति कृतज्ञता 1/15/2023 884 0
गुरुको अन्तिम उपदेश 1/15/2023 1091 0
आत्माको अविनाशिता 1/15/2023 1159 0
परमार्थता 1/15/2023 1700 0
शिष्य बिदाइ 1/15/2023 1420 0
अनुवन्ध – चतृष्टय 1/15/2023 36034 0