सद्गुरु लक्षण

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मोक्ष यात्रामा सद्गुरु आश्रयलाई साधनाको एक विशिष्ट अंग मानिन्छ । मोक्ष प्राप्त गरिसकेका सद्गुरुका लक्षणहरू कस्ता हुन्छन् ? तलका श्लोकहरूमा व्याख्या गरिन्छ –

श्रोत्रियोऽवृजिनोऽकामहतो यो ब्रह्मवित्तमः ।।३४।।
ब्रह्मण्युपरतः शान्तो निरिन्धन इवानलः ।
अहैतुकदयासिन्धुर्बन्धुरानमतां सताम् ।। ३५ ।।
तमाराध्य गुरुं भक्त्या प्रह्वप्रश्रयसेवनैः ।
प्रसन्नं तमनुप्राप्य पृच्छेज्ज्ञातव्यमात्मनः ।।३६।।

जुन महात्मा श्रोत्रिय (वेद ज्ञान बेत्ता), पापरहित, निष्काम, श्रेष्ठब्रह्मवेत्ता, ब्रह्मनिष्ठ, इन्धनरहित अग्निजस्तै शान्त, अकारण दयासागर, शरणागत भक्तहितैषी हुनुहुन्छ, त्यस्ता गुरुदेवको विनम्र सेवा र भक्तिपूर्वक आराधना गर्दै, गुरु प्रसन्न भएपछि समीपमा गएर आफ्ना प्रश्नहरू राख्नुपर्दछ । ।।३४।३५।३६।।

साधन चतुष्ट्यमा पारंगत भइसकेका मुमुक्षु, वेदज्ञानवेत्ता, ब्रह्माज्ञानी, पापरहित, ब्रह्मवेत्ताहरूमा विशिष्ट (ब्रह्मश्रेष्ठ) जसको शान्त हृदयमा अकारण करूणाको धारा प्रवाहित भइरहेको हुन्छ, यस्ता भक्तहितैषी सद्गुरुको शरणमा जानुपर्दछ । गुरुदेवको विनम्र सेवा र भक्तिपूर्वक आराधना गरी आफ्ना जिज्ञासाहरू राख्नुपर्दछ ।

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