पञ्चप्राण

0 टिप्पणीहरू 857 आगन्तुकहरू

तलको श्लोकमा पञ्चप्राणको निरूपण गरिएको छ ।

प्राणापानव्यानोदानसमाना भवत्यसौ प्राणः ।
स्वयमेव वृत्तिभेदाद्विकृतेर्भेदात्सुवर्णसलिलादिवत् ।।९७।।

विकार–भेदका कारण सुन र जललाई भिन्न मानिन्छ । यसरी नै प्राण, स्वयं पनि वृत्ति–भेदका कारणले प्राण, अपान, व्यान, उदान, समान नामले चिनिन्छ । ।।९७।।

जसरी वृत्ति–भेदका कारणले अन्तःकरणलाई मन, बुद्धि, अहंकार र चित्तमा बाँडिएको छ । त्यस्तै, एकतङ्खव प्राण शरीरका पाँच स्थानमा रहेर पाँच प्रकारका कार्यहरू गर्ने हुनाले यिनीहरूमा वृत्ति–भेदका कारण प्राण, अपान, व्यान, उदान र समान नामले चिनिन्छन् । ‘उदान वायु’ कण्ठमा स्थित रही वाणीको कार्य गर्दछ । ‘प्राण वायु’ कण्ठ र नाभीमा रही श्वासप्रश्वासको कार्य गर्दछ । ‘अपान वायु’ गुह्यद्वारको मध्यमा रही मलमुत्र निष्काशनको कार्य गर्दछ । ‘समान वायु’ नाभीको केन्द्रमा रही प्राण वायु र अपान वायुलाई सन्तुलन गर्दछ । ‘व्यान वायु’ सम्पूर्ण देहमा व्याप्त रही रक्त सञ्चालन गर्दछ ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *


CAPTCHA Image
Reload Image

पुराना लेखहरु

लेखहरु प्रकाशित मिति आगन्तुकहरू टिप्पणीहरू
किन महासतिपवान मात्र सत्यमोक्ष साधना हो ? 08 poush 2079 746 0
मंगलाचरण 1/15/2023 725 0
मुक्तिको दुर्लभता 1/15/2023 622 0
मनुष्य जन्मको दुर्लभता 1/15/2023 882 0
विचारको महङ्खव 1/15/2023 597 0
शिष्य लक्षण 1/15/2023 718 0
साधन–चतुष्टय 1/15/2023 1747 0
वैराग्य र मुमुक्षताको महङ्खव 1/15/2023 708 0
सद्गुरु लक्षण 743 0
शिष्य प्रार्थना 1/15/2023 799 0
गुरु कर्तव्य 1/15/2023 821 0
1/15/2023 589 0
शिष्य प्रशंसा 1/15/2023 644 0
मोक्षमा स्वप्रयत्नको प्रधानता 1/15/2023 660 0
शास्त्र अध्ययनको मिथ्यात्व 1'/15/2023 720 0
अपरोक्षानुभवको आवश्यकता 642 0
स्थूल शरीरको व्याख्या 1/15/2023 1051 0
विषयविन्दा 1/15/2023 710 0
देहाशक्तिको निन्दा 1/15/2023 649 0
स्थूल शरीर निन्दा 1/15/2023 832 0
दश इन्द्रियहरू 1/15/2023 1084 0
अन्तःकरण चतुष्ट्य 1/15/2023 919 0
सूक्ष्म शरीर वर्णन 1/15/2023 897 0
प्राणको धर्म 1/15/2023 560 0
अहंकार 1/15/2023 659 0
आत्माको परम प्रेमास्पदता 1/15/2023 542 0
माया वर्णन 1/15/2023 1332 0
रजोगुण 1/15/2023 692 0
तमोगुण 1/15/2023 588 0
सङ्खवगुण 1/15/2023 631 0
कारण शरीर 1/15/2023 824 0
आत्मा–निरूपण 1/15/2023 640 0
अध्यास 1/15/2023 798 0
आवरण र विक्षेपशक्ति 1/15/2023 810 0
बन्ध निरूपण 1/15/2023 608 0
अन्नमय कोश 1/15/2023 642 0
प्राणमय कोश 1/15/2023 684 0
मनोमय कोश 1/15/2023 623 0
विज्ञानमय कोश 1/15/2023 684 0
मुक्ति कसरी प्राप्त हुन्छ ? 1/15/2023 777 0
आनन्दमय कोश 1/15/2023 546 0
आत्मस्वरूप विषयक प्रश्न 1/15/2023 581 0
आत्मस्वरूप निरूपण 1/15/2023 647 0
ब्रह्मा र जगत्को एकता 1/15/2023 541 0
जगत्को मिथ्यात्व 1/15/2023 663 0
ब्रह्म निरूपण 1/15/2023 877 0
महावाक्य – विचार 1/15/2023 768 0
ब्रह्मा–भावना 1/15/2023 724 0
वासना त्याग 1/15/2023 749 0
अध्यास निराकरण 1/15/2023 742 0
अहंपदार्थ निरूपण 1/15/2023 634 0
अहंकार – मुख्यवाधा 1/15/2023 554 0
क्रिया, चिन्ता, र वासना त्याग 1/15/2023 568 0
प्रमाद – निन्दा 1/15/2023 685 0
अविद्याको स्थिति 1/15/2023 666 0
आत्म निष्ठाबाट सर्वात्मभाव 1/15/2023 639 0
समाधिद्वारा विकल्पको नाश 1/15/2023 691 0
ध्यानद्वारा परमात्मभावको प्राप्ती 1/15/2023 754 0
निर्विकल्प समाधिको महङ्खव 1/15/2023 624 0
समाधि – प्राप्तिको उपाय 1/15/2023 666 0
वैराग्य र मुमुक्षुताको आवश्यकता 1/15/2023 633 0
ध्यान विधि 1/15/2023 628 0
आत्म दृष्टि 1/15/2023 681 0
ब्रह्ममा भेदको अभाव 1/15/2023 680 0
आत्म चिन्तनको उपदेश 1/15/2023 590 0
शरीर उपेक्षा 1/15/2023 569 0
आत्मज्ञानको फल 1/15/2023 666 0
जीवनमुक्तको लक्षण 1/15/2023 685 0
प्रारब्ध कर्म विचार 712 0
प्रारब्ध निराकरण 1/15/2023 663 0
नानात्व – निषेध 1/15/2023 717 0
वेदान्त – सिद्धान्तको सार 1/15/2023 740 0
बोधोपलब्धी 1/15/2023 650 0
शिष्यको अनुभव 1/15/2023 703 0
सद्गुरूप्रति कृतज्ञता 1/15/2023 834 0
गुरुको अन्तिम उपदेश 1/15/2023 1043 0
आत्माको अविनाशिता 1/15/2023 1111 0
परमार्थता 1/15/2023 1598 0
शिष्य बिदाइ 1/15/2023 1340 0
अनुवन्ध – चतृष्टय 1/15/2023 35860 0